EPF ( कर्मचारी भविष्य निधि )
ईपीएफ क्या है?
ईपीएफ (कर्मचारी भविष्य निधि) के विषयों में सामान्य जानकारी ।अवलोकनार्थ प्रस्तुत कर रहा हूँ :-
EPF यानी Employee Provident Fund एक सेवानिवृत्ति बचत स्कीम (retirement saving scheme) है। यानी कि आप इस account में रिटायरमेेंट के दिनों के लिए पैसे बचाकर रखते हैं। service शुरू करने से लेकर रिटायरमेंट तक या service छोड़ने तक, लगातार आपकी salary से पैसा कटकर इस बचत योजना में जमा होता है। इस स्कीम में आप जितना जमा करते हैं आपकी कंपनी भी उतना ही जमा करती है। इसके अलावा अच्छी ब्याज दर, टैक्स छूट, आकस्मिक मदद जैसी तमाम खूबियां इसे खास बनाती हैं।इस स्कीम की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार है।
ईपीएफओ के पास निगरानी और प्रबंधन का जिम्मा
(EPFO has responsibility to Regulate and Management):-
EPF के रूप में कर्मचारियों की इस बचत के Management और देखभाल का जिम्मा भारत सरकार के संगठन ”कर्मचारी भविष्य निधि संगठन” (The employee Provident Fund Organisation-EPFO) का है। देश भर में सभी क्षेत्रों में इसके Offices हैं, जो अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली companies और संस्थानों के EPF की व्यवस्था देखते हैं। हालांकि, कर्मचारी को EPFO की इस स्कीम से जोड़ने का जिम्मा उसके Employer या कंपनी का होता है।
पेंशन योजना भी साथ में जुड़ी :-
EPF scheme के साथ आपकी pension scheme भी जुड़ी होती है। जो पैसा आपका EPF scheme मेें कटता है, उससे कुछ पैसा कटकर आपके pension account में जमा होता जाता है। इसी से आपको retirement के बाद पेंशन मिलती है। अगर service के दौरान किसी कर्मचारी की मौत हो जाती है तो उसके family वालों को यह pension मिलती है। सरकार ने 10 साल तक service के बाद कम से कम 1000 रुपए प्रतिमाह pension तय कर रखी है।
जमा राशि पर ब्याज भी :-
EPF में जमा पैसे पर आपको ब्याज भी मिलता है। किसी भी Bank Deposit या PPF account के मुकाबले यह ज्यादा ही रहती है। अमूमन यह 8 प्रतिशत से अधिक होती है। दरअसल EPFO इस स्कीम में जमा रकम को Bonds और शेयरों में निवेश करता है। इससे उसे ब्याज मिलती है और वह भी अपने members यानी कर्मचारियों ब्याज देने में सक्षम होता है।
जमा और ब्याज पर टैक्स छूट भी :-
EPF scheme में जमा पैसे पर आपको Tax benefit भी मिलता है। इसमें कटने वाला पैसा, उसकी ब्याज और अंत में जो maturity amount आपको मिलता है, सब कुछ tax-free होता है। बशर्ते, कम से कम पांच साल की नौकरी आपने पूरी कर ली हो।
ईपीएफ या पीएफ, सही क्या?
आपने PF Scheme के बारे में लाेगों के चर्चा करते सुना होगा। कभी लोग इसे EPF कहते हैं तो कभी PF कहते हैं। सही क्या है? हम बताते हैं। दरअसल Provident Fund या PF शब्द का प्रयोग, दुनिया भर में उस बचत के लिए किया जाता है, जो retirement saving account में जमा की जाती है। चूंकि सरकार की यह scheme सिर्फ संगठित क्षेत्र (organised sector) के कर्मचारियों के लिए होती है। इसलिए इसे Employee Provident Fund Scheme या ईपीएफ स्कीम कहते हैं। मतलब यह कि अगर कोई PF scheme or PF account की बात करता है तो वह सीधे-सीधे EPF के बारे में बात करता है।
EPF के अलावा आप Bank या Post Office में ऐसी ही Retirement बचत स्कीम का account खुलवा सकते हैं। इसे हम public provident fund या PPF account के नाम से जानते हैं। होता यह भी PF ही है, लेकिन बोलचाल की भाषा में इसे ‘PPF’ ही कहा जाता है। PF सिर्फ EPF के लिए इस्तेमाल होता है।
आप ईपीएफ के सदस्य कैसे बनेंगे?
EPF scheme का लाभ उठाने के लिए आपको इसका member बनना होता है। member आप EPF account खोलकर ही बन पाते हैं। आपका ये EPF account तभी खुल सकता है, जबकि आप किसी Company या संस्थान में काम करते हों। बिना service के EPF account नहीं खोला जा सकता।
जब आप किसी Company में ज्वाइन करते हैं तो आपका employer या HR आपको एक EPF registration form देता है। EPF की पहली किस्त के साथ जब आप इस Form को जमा कर देते हैं, तभी आप इस scheme के मेंबर बन जाते हैं। EPF registration form को EPFO की शब्दावली में form 11 के नाम से जाना जाता है। यह फॉर्म EPFO को नहीं भेजा जाता, बल्कि यह आपके employer के पास ही रहता है। इस Form में जो सूचनाएं आप भरते हैं, उनको आपका नियोक्ता EPFO के ऑनलाइन प्लेटफार्म UAN Employer Portal पर दर्ज कर देता है।
आधार नंबर भी लिंक करें तो बेहतर
अब आपको EPF Form में अपना Aadhaar नंबर डालना अनिवार्य नहीं है, लेकिन आधार नंबर लिंक रहने से आपको बहुत सहूलियत रहती है।EPFO आपके Aadhaar Database से आपकी पहचान और पता (identity and address) संबंधी जानकारियां ले लेता है। Aadhaar नंबर दर्ज (link) होने से EPFO के साथ-साथ आपको भी बहुत सहूलियत रहती है। आगे कभी EPF का पैसा निकालने या Transfer करने में समस्या नहीं आती। जरूरत पड़ने पर बिना employer के हस्तक्षेप के आसानी से आप इन कामों को निपटा सकते हैं।
जैसे ही किसी कर्मचारी के नाम पहली बार EPFO में पैसा जमा होता है, UAN member portal तुरंत उसे उसका EPF account number एलॉट कर देता है।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की भूमिका :-
EPFO या Employee Provident Fund Organisation ही वह संस्था है जो EPF scheme की सारी व्यवस्थाएं देखता है। अपने क्षेत्रीय केंद्रों (regional offices) के माध्यम से यह सारी गतिविधियों को संचालित करता है। EPFO का मेंबर बनने से लेकर पैसा निकालने तक के सारे काम इसके जिम्मे हैं। अब हालांकि, इसने सभी registered members का central database बनाया है।
EPFO यह सुनिश्चित करता है कि ऐसे सभी Organisations जिनके पास 20 से ज्यादा कर्मचारी हैं, वे EPF scheme में जरूर जुड़ें। EPFO यह भी सुनिश्चित करता है कि हर employer महीने के महीने कर्मचारी का और अपना अंशदान (contribution) ईपीएफ अकाउंट में जमा करता रहे। इसके अलावा उसे अपने कर्मचारियों को EPF की ओर से मिलने वाली services भी उपलब्ध करानी होती हैं। अगर कोई employer इस संबंध में जारी दिशा-निर्देशों (guidelines) का पालन नहीं करता है, तो उसे EPFO दंडित भी कर सकता है।
EPFO की यह भी जिम्मेदारी होती है कि वह EPF में जमा राशि काे बुद्धिमानीपूर्वक (wisely) निवेश योजनाओं में लगाए? ताकि, EPFO को अधिकतम return मिल सके और कर्मचारियों को ज्यादा से ज्यादा benefit दिया जा सके।
ईपीएफ में अंशदान :-
EPF account में आपकी basic salary का कम से कम 12% कटना जरूरी है। ये 12% आपकी basic salary और महंगाई भत्ते के Dearness allowance के योग का होता है। कोई कर्मचारी चाहे तो इससे ज्यादा भी deposit कर सकता है। 12 प्रतिशत के अलावा जो भी रकम जमा होती है, उसे ऐच्छिक पीएफ अंशदान कहते हैं। अंग्रेजी में इसे Voluntary PF Contribution या VPF कहा जाता है।
Employer को भी अपनी ओर से कर्मचारी की basic Salary के 12 प्रतिशत के बराबर रकम इसमें जमा करनी होती है। अगर वह 12 प्रतिशत से ज्यादा रकम जमा करता है, तो उस पर tax लगता है। 12 प्रतिशत तक का अंशदान (contribution) टैक्स फ्री होता है।
employer का जो 12% योगदान होता है, उसमें से 8.33% पेंशन स्कीम में चला जाता है। बचा हुआ 3.67 प्रतिशत ही आपके EPF Account में जमा होता है। हालांकि pension Scheme में अधिकतम 1250 रुपए प्रतिमाह ही जमा किया जा सकता है। अगर 1250 रुपए सैलरी के 8.33 प्रतिशत से कम है तो बचा हुआ हिस्सा EPF Account में ही जमा होता है।
ईपीएफ अकाउंट स्टेटस :-
ज्यादातर कर्मचारियों के लिए EPF account रिटायरमेंट के दिनों के लिए सबसे बड़ा investment होता है। जाहिर है, इसमें deposit हो रहे पैसों को लेकर आपके मन में उत्सुकता रहेगी। इसी के आधार पर आप retirement के बाद अपनी निवेश योजना भी बनाना चाहते होंगे। तो, EPFO इसका balance status जानने की सुविधा भी दे रखी है। आप जब चाहें, जान सकते हैं कि आपके EPF Account में अब तक कितना पैसा जमा हो चुका है। पैसा employer की ओर regularly जमा हो रहा है कि नहीं।
आप अपना EPF account status निम्नलिखित दो तरीकों से जानते हैं :-
1. आप किसी भी समय अपने खाते का final EPF balance चेक कर सकते हैं।
2. आप चाहें तो पूरी EPF passbook भी देख सकते हैं, जिसमें आपके खाते में जमा हर installment का statement मौजूद होता है।
ईपीएफ बैलेंस चेक :-
अपना EPF Balance check करने के लिए आपके पास कई रास्ते हैं। आप नीचे दिए गए तरीकों में से किसी का भी प्रयोग करके अपना EPF balance जान सकते हैं।
1.मिस्ड काल करके पीएफ बैलेंस
2.एसएमएस भेजकर
3.मोबाइल एप से
4.मासिक एसएमएस अपडेट से
ईपीएफ पासबुक डाउनलोड करना :-
अपने EPF account का सिलसिलेवार ब्योरा (detailed statement) जानना चाहते हैं तो आपको ऑनलाइन EPF passbook डाउनलोड करनी होगी। इसमें आपके EPF account में, आपकी ओर से और आपके employer की ओर से जमा की गई हर installment का ब्योरा अलग-अलग दिया रहता है। आपके pension account में जमा हो रही रकम का भी detail इसमें रहता है।
*यूएएन नंबर ( UAN Number) :-
जैसे ही आप EPF scheme के मेंबर बनते हैं, EPFO आपको एक universal account number यानी UAN आवंटित करता है। ये UAN नंबर आपकी एक निश्चित (Fix) पहचान संख्या होती है। जो UAN नंबर पहली बार आपको मिलता है, वही Permanent बना रहता है। आगे की हर service के दौरान और service के बाद भी। service बदलने पर आपका EPF account number बदल जाता है तो नया हर account इसी परमानेंट UAN नंबर से जुड़ता जाता है। इससे आपको अपना पैसा पुराने EPF Account से नए ईपीएफ अकाउंट में Transfer करने की सुविधा रहती है।
अब तो EPFO ने EPF के संबंध में किसी भी प्रकार की Information या सुविधा UAN के माध्यम से ही देना अनिवार्य कर दिया है। चाहे आपको अपना Balance check करना हो, या balance transfer करना हो, या पीएफ निकालना (EPF withdrawal) हो। सारी सेवाएं आपके UAN नंबर के साथ link कर दी गई हैं।
यूएएन मेंबर पोर्टल-ऑनलाइन सेवा :-
ईपीएफओ ने EPF members के लिए अलग से एक portal भी बनाया है। इसका वेब एड्रेस है— unifiedportal-mem.epfindia.gov.in यह पोर्टल UAN नंबर पर ही आधारित है। यानी कि यहां कोई भी service यूएएन नंबर से ही मिलेगी। EPFO अपनी ज्यादातर सेवाएं इस पोर्टल से ही उपलब्ध कराता है। इस पोर्टल पर आप क्या-क्या सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं, आइए जानते हैं
नौकरी बदलने पर :-
आप UAN Portal के माध्यम से अपने एक EPF account से दूसरे EPF account में अपना EPF balance ट्रांसफर कर सकते हैं।
आप इस Portal के माध्यम से सीधे अपने PF का पैसा निकाल सकते हैं, चाहे आंशिक रूप से हो (partial withdrawal) या पूरे पीएफ को निकालना हो (full EPF withdrawal)। हालांकि इन सुविधाओं को पाने के लिए आपके UAN नंबर से आपके Aadhaar नंबर का लिंक होना अनिवार्य है।
आप UAN पोर्टल के माध्यम से अपने KYC documents अपडेट कर सकते हैं या जमा कर सकते हैं। आप इसके जरिए अपना बैंक खाता भी बदल सकते हैं। आपके KYC documents, विशेषकर Aadhaar अपडेट होने से EPF निकालने और पेंशन सुविधा लेने में आसानी हो जाती है। UAN से Aadhaar लिंक होेने के बाद इन सुविधाओं को पाने में आपके employer की भूमिका नाममात्र की रह जाती है। उसे सिर्फ आपकी ओर से Online जमा किए गए KYC documents, को Online मंजूरी देना भर होता है।
आप अपनी पहचान से जुड़े Personal Details को यूएएन पोर्टल पर देख सकते हैं। उनमें कोई त्रुटि (error) होने पर उन्हें अपने Employer या HR के माध्यम से सुधरवा भी सकते हैं। इन errors के दूर होेने से आगे आपको EPF transfer या पैसा निकालने में अड़चन का सामना नहीं करना पड़ेगा।
UAN member portal आपकी service history को भी प्रदर्शित करता है। यानी कि आपने किस संस्थान में कब से कब तक service की है, यहां आप देख सकते हैं।
यूएएन एक्टिवेशन और लॉगइन
UAN Activation and Login
EPF की सभी ऑनलाइन सेवाओं को पाने के लिए आपको UAN member portal पर रजिस्टर्ड होना जरूरी होता है। इसलिए किसी भी कर्मचारी को अपना UAN नंबर मिलते ही, जल्दी से जल्दी खुद को UAN member portal पर registerd कर लेना चाहिए। registration की प्रक्रिया के दौरान ही आपको अपना UAN नंबर activate भी करना होता है। UAN नंबर से लिंक कोई भी EPF संबंधी सेवा आप तभी प्राप्त कर सकते हैं, जबकि आपका UAN नंबर activate हो। दरअसल UAN activation आपकी व्यक्तिगत पहचान (identity) पुख्ता करने का जरिया होता है।
क्योंकि UAN activation के दौरान आपको अपने personal details को दस्तावेजों के माध्यम से सत्यापित (verified) करना होता है। साथ ही अपना mobile number और email address भी जमा करना होता है। आगे कभी password भूलने पर आप अपने registered mobile number की मदद से उसे दोबारा भी सेट कर सकते हैं।
ईपीएफ ट्रांसफर :-
जब आप एक service छोड़कर दूसरी service ज्वाइन करते हैं तो नई कंपनी आपका नया EPF account खुलवाती है। ऐसे में पुराने EPf account का पैसा नए EPF account में ट्रांसफर करवाना पड़ता है। आपके UAN नंबर की मदद से यह आसानी से हो जाता है। क्योंकि UAN नंबर पहली से लेकर अंत तक की सारी नौकरियों में एक ही रहता है। आपके सारे EPF account उसी UAN नंबर से जुड़ते जाते हैं। अगर आप UAN नंबर से अपना Aadhaar नंबर भी लिंक कर लेते हैं या करवा लेते हैं तो फिर बिना employer के हस्तक्षेप के भी आप अपने पुराने EPF account का पैसा नए EPF account में ट्रांसफर कर सकते हैं।
UAN member portal पर आप अपने सारे EPF account को एक साथ देख और manage कर सकते हैं। इस पर login करके जब चाहें आसानी से अपना पैसा transfer कर सकते हैं।
ईपीएफ निकासी यानी पीएफ निकालना :-
EPF का पैसा निकालना आपकी सबसे बड़ी चिंता हो सकती है। service पूरी होने पर या नौकरी के दौरान भी किसी अत्यंत आवश्यक condition होने पर, आप अपने PF का पैसा इन तीन तरीकों से निकाल सकते हैं—
रिटायरमेंट के बाद पीएफ का पैसा निकालना :-
नौकरी छोड़ने के बाद मेच्योरिटी के पहले ही पैसा निकालना
Premature Withdrawal After Leaving Job
नौकरी के दौरान आंशिक यानी कुछ हिस्सा निकालना
Partial Withdrawal During Job
रिटायरमेंट के बाद पीएफ निकालना
Withdrawal After Retirement
Retirement के बाद पीएफ का पैसा निकालना अक्सर आसान होता है, क्योंकि आपका employer या HR सहयोगपूर्ण रवैया अपनाते हैं। आप इसके लिए UAN पोर्टल के माध्यम से भी Online आवेदन कर सकते हैं। लेकिन ऐसा तभी आप कर सकेंगे, जबकि अपने UAN नंबर से Aadhaar नंबर लिंक करवा लिया हो। फिर आप अपना पूरा EPF balance निकाल सकते हैं।
नौकरी छोड़ने के बाद पैसा निकालना :-
कोई service छोड़ने के बाद, maturity अवधि से पहले, पीएफ का पैसा निकालना (Premature withdrawal) थोड़ा मुश्किल होता है। क्योंकि ऐसे मामले में कभी-कभी employer या HR का रुख सहयोगी नहीं रहता। आपको मुश्किल authentication process से गुजरना पड़ सकता है। लेकिन, अगर आपने पहले से UAN नंबर से अपना Aadhaar नंबर लिंक करवा रखा है तो आप इस परेशानी से बच जाएंगे। आप बिना HR की मदद से खुद ही Online पूरी प्रक्रिया निपटा सकते हैं।
आंशिक पीएफ निकालना :-
किसी अनिवार्य आवश्यकता (need) पर कुछ मात्रा में पीएफ निकालना (Partial EPF withdrawal) अब काफी आसान हो गया है। EPFO ने ऐसे कारणों की list जारी की है, जिनके लिए आप आंशिक रूप से PF का पैसा निकाल सकते हैं। पहले आपको अपनी जरूरत (need) को प्रमाणित करना होता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। अब सिर्फ आप अपनी जरूरत का उल्लेख करके भी PF का कुछ हिस्सा निकाल सकते हैं। UAN portal के माध्यम से भी आप आंशिक PF निकाल सकते हैं।
ऐसी स्थिति में PF का पैसा निकालने के लिए आपको निर्धारित Form भरकर देना होता है। अब तो सभी तरह के EPF निकालने के लिए एक फॉर्म (composite claim form) आता है। यह फॉर्म दो तरह का होता है। एक form उन लोगों के लिए होता है, जिन्होंने Aadhaar लिंक कराया होता है, और दूसरा form उन लोगों के लिए होता है, जिन्होंने Aadhaar लिंक नहीं कराया होता है।
बिना आधार लिंक वाला फॉर्म (Non-Aadhaar form) आपको नियोक्ता या HR के पास जमा करना होता है। वह उसको प्रक्रिया के लिए आगे बढ़ाता है। Aadhaar लिंक वाले फॉर्म में employer के हस्ताक्षर की जरूरत नहीं होती। इसे आप डायरेक्ट EPFO office में ले जाकर जमा कर सकते हैं। आप इस फॉर्म को Online भी भर सकते हैं।
ईपीएफ क्लेम स्टेटस चेक :-
EPF transfer या EPF निकालने (withdrawal) के लिए आवेदन देने के बाद आपको आवेदन का status check करने की जरूरत होती है। यानी कि आपके आवेदन पर process कहां तक पहुंची, ये जानना ही status check करना होता है। EPFO ने इसके लिए Online सुविधा भी जारी की है। इसके लिए सबसे आसान तरीका हेाता है, UAN Portal पर Login करना। आप अपने UAN dashboard पर जाकर डायरेक्ट अपने आवेदन का status check कर सकते हैं।
ईपीएफ में जमा पैसे पर टैक्स छूट :-
EPF से आपको मिलने वाले पैसे पर पूरी तरह टैक्स छूट मिलती है। इसीलिए इसे ट्रिपल ई स्कीम (exempt, exempt, exempt- EEE) भी कहा जाता है।
EPF में जमा होने वाला पैसा इनकम टैक्स के section 80C के तहत टैक्समुक्त होता है। tax deduction under section 80C.
इस account पर आपको सालाना ब्याज भी मिलता है। यह ब्याज भी पूरी तरह taxfree होता है। exempted from tax
EPF की परिपक्वता राशि (maturity amount) भी पूरी तरह टैक्स मुक्त (exempted) होता है।
Note :-
ईपीएफ में जमा रकम पर बताई गई Tax छूट पाने के लिए आपको कम से कम पांच साल तक EPF Member बने रहना होता है। यानी कि कम से कम पांच साल तक इस account में पैसा जमा होता रहे। अगर आप 5 साल नौकरी पूरी होने के पहले कभी EPF का पैसा निकालते हैं तो इस amount पर आपको अपने Tax Slab के अनुसार टैक्स भी चुकाना होगा।
ईपीएफ पेंशन या ईपीएस क्या है?
ईपीएफ दरअसल complete retirement package होता है। इसमें EPF के साथ-साथ एक pension scheme भी चलती है। इस पेंशन स्कीम को कर्मचारी पेंशन योजना (Employee Pension scheme) कहते हैं। आपके EPF में जो employer का हिस्सा होता है, उसमें से दो तिहाई हिस्सा कटकर आपके लिए pension scheme में जमा होता जाता है। हालांकि, यह 1250 रुपए महीने से अधिक नहीं होना चाहिए। बाकी हिस्सा EPF में जमा होता है।
इसी फंड में से आपको retirement के बाद पेंशन मिलती है। अगर, किसी कर्मचारी की service के दौरान मौत हो जाती है तो उसे परिवार को ये pension मिलती है। pension का लाभ पाने के लिए आपको इस scheme में कम से कम 10 साल तक पैसा जमा होना चाहिए। अगर आप इससे पहले service छोड़ते हैं तो आपको pension लाभ नहीं मिलेगा।
Note :-
सामान्य रूप से पेंशन आपको retire होने पर या 60 साल उम्र पूरी होने पर मिलती है। लेकिन इसके पहले आप चाहें तो 50 साल उम्र पूरी होने पर भी pension लाभ ले सकते हैं। लेकिन ऐसा करने पर pension कुछ कम होकर मिलती है।
ईपीएफ की गणना :-
EPF संबंधी गणना (EPF calculation) के कुछ तरीके हैं। जिनको हम एक-एक करके आपको बताएंगे। ध्यान दें, EPF की गणना मुख्य रूप से आपकी basic salary पर आधारित होती है। अगर महंगाई भत्ता (DA) मिलता है तो उसे भी इसमें शामिल करते हैं। तो, यहां calcuation करते वक्त जब भी हम basic salary का जिक्र करेंगे, तो उसमें महंगाई भत्ते को अपने आप शामिल मानेंगे।
ईपीएफ अंशदान की गणना :-
जैसा कि हम ऊपर बता चुके हैं, आपकी basic salary का 12% ईपीएफ अकाउंट में जमा होता है। आपके खाते में अब तक कितना पैसा जमा हो चुका होगा, ये जानने के लिए हम नीचे बताए दो Steps अपनाते हैं।
अपनी basic salary को 100 से भाग दीजिए।
उदाहरण के लिए आपकी सैलरी 30,000 हैं तो इसे 100 से भाग देने पर आया 300 रुपए।
जो भागफल यानी उत्तर आया है, उसे 12 से गुणा कर दीजिए।
हमारे उदाहरण मे भागफल 300 रुपए आया है। 300 को 12 से गुणा करने पर उत्तर आया 3600 रुपए।
इस प्रकार 30000 रुपए की बेसिक सैलरी वाले कर्मचारी के EPF account में हर महीने 3600 रुपए कटेंगे। इतना ही यानी कि 3600 रुपए महीने आपकी कंपनी की ओर से जमा होंगे। हालांकि, कंपनी के अंशदान (contribution) में से कुछ हिस्सा कटकर आपके pension account में चला जाता है।
पेंशन खाते में जमा पैसे की गणना :-
पेंशन स्कीम में आपकी basic salary का 8.33% जमा होता है। लेकिन यह 1250 रुपए से अधिक नहीं हो सकता।
ईपीएफ की गणना में बताए गए तरीके को ही यहां भी इस्तेमाल करेंगे। बेसिक सैलरी 30,000 होने पर उसका 8.33 प्रतिशत होगा 2499 रुपए। अब चूंकि, पेंशन में 1250 रुपए से अधिक नहीं हो सकता, इसलिए आपके पेंशन खाते में सिर्फ 1250 रुपए ही जमा होंगे, इसलिए नियोक्ता की ओर से जमा होने वाले 12 प्रतिशत यानी 3600 में से 1250 के अलावा बाकी पैसे 3600-1250=2350 रुपए ईपीएफ में ही जमा हो जाएंगेे।
ईपीएफ अकाउंट में कुल अंशदान :-
आपके ईपीएफ अकाउंट में कुल पैसा जमा होगा-
कर्मचारी का हिस्सा+(नियोक्ता का हिस्सा-पेंशन में कटा हिस्सा)
अपने उदाहरण में इस formula को लागू करने पर हर महीने कुल EPf अंशदान होगा (3600+2350)- 6950
ब्याज की गणना :-
EPF पर ब्याज दर की घोषणा हर साल financial year खत्म होने के पहले कर दी जाती है। इसी के आधार पर बीते हुए वर्ष मेें जमा पैसे पर ब्याज की गणना होती है। EPF पर ब्याज की गणना हर financial year के अंतिम दिन यानी 31 march को होती है।
चूंकि ब्याज इसमें सालाना जोड़ा जाता है, इसलिए आपको साल के बीच में कोई ब्याज नहीं मिलता।
आप अपने EPF में जमा रकम पर ब्याज की गणना नीचे बताए गए 3 Steps में कर सकते हैं।
Step 1.
EPF पर ब्याज, उस बैलेंस पर मिलता है, जो पिछले साल की 5 april तक जमा होता है। तो आप भी अपने EPF account में देखिए कि 5 अप्रैल तक कितना पैसा जमा हुआ है। उसको ब्याज दर से गुणा कर दीजिए। (Balance *rate/100).
Step 2.
अब आपको इस financial year के महीनों में जमा हुए पैसे का ब्याज पता करना है। हर महीने के बाद financial year का बचा हुआ समय घटता जाता है, इसलिए हर महीने के contribution पर अलग-अलग ब्याज जोड़ना होगा।
इसके लिए आपको कुछ नहीं करना बस सालाना ब्याज दर (annual interest rate) को 12 से भाग दे दीजिए। इससे आपको मासिक ब्याज दर (monthly interest rate) का पता चल जाएगा। अब जिस instalment के बाद वित्तीय वर्ष के जितने महीने बचे हैं, उतने महीनों का ब्याज निकाल लीजिए।
Step 3.
अब पिछले साल के last balance पर कुल ब्याज को और इस साल के मासिक बैलेंसों (Monthly balances) पर निकली ब्याज की रकमों को जोड़ दीजिए। आपका कुल ब्याज (Total Interest) निकल आएगा।
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